हौसला और जीवट
हर आँख में कुछ सपने होते हैं अरमान होते हैं आगे बढ़ने का जुनून होता कुछ पाने की ललक होती है और इसमें वो सफलता भी हासिल कर लेते हैं लेकिन कई बार हम सफल नहीं हो पाते या फिर उतने सफल नहीं हो पाते जितना हमने सोच रखा होता है तो क्या करना चाहिए? रुक जाना चाहिए? या अपने सपनों को तिलांजलि दे देनी चाहिए? तो क्या हमें समाज, और दुनिया को कोसना चाहिए या खुद को मार देना चाहिए ? इन सवालों में घिरा आज का युवा बहुत जल्दी घबरा जाता है बस यही सोच कई अनमोल जिंदगियों को निगलती जा रही है जिसमें आम इंसान से लेकर कामयाब लोग तक शामिल है लेकिन जीवन लीला समाप्त करने के बजाए हम ये क्यों न सोचे कि चुनौतियों से कैसे निपटे क्योंकि ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका अंत ना हो या समाधान न हो। माना कि सबकी समस्याएं अलग -२ होती है परंतु समाधान भी होता है किसी भी तर्क से आत्महत्या जैसे कुकृत्य को सही नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि मरने वाले अपने परिवार पर सवालिया निशान और स्वंय पर कायर होने का ठप्पा लगा जाते हैं । तो मैं एक घटना बताती हूँ कि कैसे एक लड़की के हिम्मत और साहस ने सब कुछ बदल कर रख दिया...