लॉक डाउन 3.0 सवालों का घेरा Motivational

चार मई से तीसरा  लॉक डाउन
कहाँ से आई ये महामारी,
जिसने जीवन के रंग छीन लिए।
लेकर संसार की सारी आजादी ,
सबको घरों में बंद कर दिए।
प्रिय दोस्तों फिर से  चौदह दिनों का लॉक डाउन
बढ़ गया और हम दो हफ्ते के लिए वापस सुरक्षित
हो गए लेकिन कब तक लॉक डाउन के जरिए हम
सुरक्षित रह पाएंगे? हम सब के पास जरूरतों का
 पहाड़ है, जो घर से निकालने के लिए मजबूर
करता है हमारे दायित्व हमें चैन से बैठने नहीं देता।
खास तौर से रोज के कमाने खाने वाले की परेशानी
बहुत बढ़ गई है और आज बहुत सारे लोगों के सामने
रोजी रोटी का सवाल सुरसा की तरह मुँह बाए खड़ा
हो गया है लेकिन चिंता तथा घबराहट किसी समस्या
का समाधान नहीं है आज भी आप पहले की तरह ही
पैसे कमा सकते हैं जी हाँ आपने सही समझा ।
भुखमरी से कैसे बचें लॉक डाउन में ?
 सिर्फ और सिर्फ आपको अपना तरीका बदलना है वो कहते है न "हवा का रूख देखकर चाल बदलना" अब आपको अपनाव्पायार बदलने की जरूरत है मतलब अगर आप
प्लासटीक के समान की दुकान चलाते है तो थोड़ा सा
सकारात्मक सोच रखते हुए उसी दुकान में फल
 या सब्जी रख कर देखिए आपकी बिक्री शुरू हो
जाएगी और साथ ही किसी को प्लासटीक के समान
की जरूरत होगी तो वो भी बीक जाएगा क्योंकि ये
ऐसा दौर है जहाँ खाने के अलावा इंसान कोई दूसरी
चीज़ ढूंढ ही नहीं रहा है।इस कठिन दौर में भी कुछ
ऐसे बेमिसाल लोग हैं जो हमें प्रेरणा देकर कठिनाइयों
से लड़ कर आगे बढ़ने की राह दिखाते है कि  कैसे
एक साधारण सा व्यकित भी असाधारण कार्य करके
हमें कैसे  जीना सीखा देता है मैं बताती हूँ  - एक दिन
मेरी गली में एक सब्जी वाला आया आवाज़ कुछ जानी पहचानी सी थी इसलिए मैं उसे ठीक से देखे बीना ही
मुड़ गई लेकिन उसने आवाज़ देकर मुझे बुलाया -दीदी
मैं सब्जी लाया हूँ, आपने सोचा होगा कि ये तो झाड़ू
वाले भैया हैं, है न दीदी?
क्या करूंँ दीदी, पहले दस दिन तो मैं घर पर ही बैठा
रहा फिर मैंने सोचा कि जब किसी के पास काम ही
नहीं है तो लोग झाड़ू खरीदना होगा तो भी नहीं खरीदेंगे।
क्यों न मैं कोई ऐसा काम करूँ जिससे मेरी कुछ कमाई हो जाए ठेला तो मेरे पास था ही अपने दोस्त से मैंने तराज़ू
उधार ले लिया और सब्जी लाकर बेचने लगा, पता है दीदी मुझे कोई बता भी नहीं रहा था कि सब्जी मंडी कहाँ है
लेकिन मैंने हार नहीं मानी और ढूँढ कर वहाँ पहुँच गया।
बहुत अच्छा किया भैया, इस महामारी के समय आप
हमें हरी सब्जियां ला कर दरवाजे पर दे रहे आपको जितना
भी धन्यवाद दूँ कम है । बस आप अपना ख्याल रखना, सेनेटाइजर है आपके पास , और सबसे दूर से ही बात
नाक मुँह को ढक कर रखना हैं समझे भैया?  मैने उसे समझाते हुए कहा।
वीना मिश्रा (रत्ना)




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